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चैत्र यात्रा के बारे में

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जय माता दी

चैत्र यात्रा के बारे में

चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को गाँव के प्रत्येक घर से लोग पूजा लेकर माँ अम्बा भवानी के दरबार में पहुँचते हैं। मान्यताओं के अनुसार, नीम की पत्तियों की छाया में दरबार में पहुँचकर अपनी मन्नत पूर्ण होने पर नारियल अर्पित कर माँ का धन्यवाद करते हैं। कई भक्त माँ को प्रसन्न करने के लिए अपने शरीर में धागे पिरोकर नृत्य करते हैं।

चैत्र नवरात्रि में माँ के भक्तों द्वारा नौ दिनों तक विशेष श्रृंगार किया जाता है। इसके बाद समिति द्वारा सात दिनों तक वरिष्ठ पंडितों द्वारा भागवत और महायज्ञ का आयोजन किया जाता है। चैत्र यात्रा के एक दिन पूर्व, चुनरी यात्रा समूह द्वारा भव्य चुनरी यात्रा निकाली जाती है, जिसमें विभिन्न झांकियाँ शामिल होती हैं।

चैत्र के दिन सुबह से ही गाँववासी और वे लोग जो नौकरी के कारण गाँव से बाहर चले गए हैं, इस दिन गाँव आकर माँ की पूजा-अर्चना और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए अवश्य आते हैं। चैत्र यात्रा वाले दिन, माँ की मनोकामनाएँ पूरी होने पर श्रद्धालु गाढ़े खींचते हैं और शरीर में धागे पिरोकर अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं। उसी दिन शाम को गाँव में भव्य मेले का आयोजन होता है। अंत में, आखिरी दिन गाँव में भंडारे के साथ कार्यक्रम का समापन होता है।

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माँ अम्बा भवानी का आशीर्वाद आप पर सदैव बना रहे। जय माता दी!

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मंदिर की सेवा और सुविधाएँ

मंदिर परिसर में भक्तों के लिए विभिन्न सुविधाएँ उपलब्ध हैं, जैसे:
  • पूजा और अर्चना के लिए समुचित व्यवस्था
  • प्रसाद वितरण
  • मंदिर परिसर की साफ-सफाई और देखरेख
  • भक्तों के लिए विश्राम स्थल
  • विशेष अवसरों पर भंडारे का आयोजन

अम्बा देवी मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि आस्था, श्रद्धा, और सामुदायिक एकता का प्रतीक भी है। यहाँ आने वाले प्रत्येक भक्त को माँ अम्बा भवानी की कृपा प्राप्त होती है और उनके जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि का संचार होता है। जय माता दी।

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